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लूट और झूठ की दुकान हैं राजनीति

देश में बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार और नेताओं के आपसी आरोप-प्रत्यारोप से परेशान जनता अब खुलकर अपनी नाराज़गी जाहिर करने लगी है। आम लोगों का कहना है कि राजनीति अब जनता की सेवा का माध्यम नहीं रही, बल्कि “लूट और झूठ की दुकान” बन चुकी है। गांव-गांव और शहर-शहर में लोग कहते सुने जा रहे हैं कि नेता चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद जनता की समस्याओं की सुध लेने कोई नहीं आता। बेरोज़गारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने के बजाय राजनीति में झगड़े और घोटाले बढ़ते जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नेताओं को जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ बंद कर पारदर्शिता और ईमानदारी से काम करना चाहिए। वरना जनता को मजबूरन सड़कों पर उतरकर विरोध करना पड़ेगा।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आक्रोश आने वाले चुनावों में नेताओं के लिए खतरे की घंटी है। अगर हालात नहीं सुधरे तो जनता नई राजनीतिक ताकतों को मौका दे सकती है।

में जीवन में एक प्रयास करता हूं कि सत्य ईमानदारी सच्चाई के साथ हर मनुष्य को साथ लेकर चलू जीवन एक संघर्ष की कहानी है जो हर इंसान के जीवन में उतार चढ़ाव आता रहता है

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