Business
Entertainment
Fashion
Lifestyle
World
प्रादेशिक
राजनीतिक
@ashokgahalot @bhajnlalsharma @tikaramjully, bhajnlalsharma, BJP Rajasthan, CMO RAJASTHAN, Highlight jaipur, Jaipur Rajasthan, madanrathor, Narendramodi, Rajasthan is gearing up to become a major hub for aerospace and defence manufacturing.
सुभाष बैरवा
0 Comments
राजस्थान बनेगा एयरोस्पेस और डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग हब
जयपुर, 28 जनवरी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार विकसित राजस्थान के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बहुआयामी विकास नीति के साथ कार्य कर रही है। कृषि, ऊर्जा, पेयजल, शिक्षा, बुनियादी ढांचा, चिकित्सा, उद्योग जैसे क्षेत्रों में प्रगति की रफ्तार बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इसके साथ ही, एयरोस्पेस और डिफेंस विनिर्माण तथा सेवाओं में राज्य की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने एवं राष्ट्र की एयरोस्पेस और डिफेंस विनिर्माण उपलब्धियों में राजस्थान के योगदान को बढ़ावा देने के उदद्ेश्य से राज्य सरकार राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेंस नीति लाई है। यह नीति प्रदेश में रक्षा तथा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहन देने के साथ ही राजस्थान को एयरोस्पेस और डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण हब बनाने की दिशा में सहायक होगी। इस क्षेत्र में बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ-साथ एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित इकोसिस्टम के विकास पर केन्द्रित यह नीति आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा देगी। इस नीति के अंतर्गत प्रदेश में एयरोस्पेस एण्ड डिफेन्स क्षेत्र के विनिर्माण उद्यमों, उपकरण एवं घटक निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, प्रिसीजन इंजीनियरिंग इकाइयों और मेंटेंनेंस, रिपेयर एवं ओवरहॉलिंग से जुड़ी इकाइयों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा।*विनिर्माण परियोजनाओं और सर्विस सेक्टर को बांटा जाएगा तीन-तीन श्रेणियों में* इस नीति के अन्तर्गत विनिर्माण परियोजनाओं को न्यूनतम 50 करोड़ रूपये से 300 करोड़ रूपये तक अचल पूंजी निवेश करने पर लार्ज, 300 करोड़ से 1 हजार करोड़ रूपये के निवेश पर मेगा और 1 हजार करोड़ रूपये से अधिक के निवेश पर अल्ट्रा मेगा परियोजना की श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं, सर्विस सेक्टर के लिए 25 करोड़ से 100 करोड़ रूपये तक अचल पूंजी निवेश वाली परियोजनाएं लार्ज, 100 करोड़ से 250 करोड़ रूपये तक मेगा और 250 करोड़ से अधिक के निवेश वाली परियोजनाएं अल्ट्रा मेगा की श्रेणी में रखी जाएंगी।*विनिर्माण और सर्विस सेक्टर परियोजनाओं को मिलेंगे विभिन्न लाभ* नीति के तहत ए एण्ड डी पार्कों में लगने वाले पात्र एयरोस्पेस एवं डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग और सेवा उद्यमों को एसेट क्रिएशन इन्सेन्टिव के रूप में 7 वर्षों तक राज्य कर के 75 प्रतिशत पुनर्भरण का निवेश अनुदान दिया जाएगा। साथ ही, विनिर्माण उद्यमों के लिए 20 से 28 प्रतिशत और सर्विस सेक्टर के लिए 14 से 20 प्रतिशत तक 10 वर्षों में वितरित पूंजीगत अनुदान अथवा 10 वर्षों तक वार्षिक किश्तों में देय 1.2 प्रतिशत से 2 प्रतिशत तक टर्नओवर लिंक्ड प्रोत्साहन में से किसी एक विकल्प का चयन करने की सुविधा दी जाएगी। इसके अतिरिक्त इन प्रोत्साहनों पर टॉप-अप के रूप में 10 से 15 प्रतिशत एम्प्लॉयमेंट बूस्टर, पहली तीन मेगा अथवा अल्ट्रा मेगा इकाइयों के लिए 25 प्रतिशत सनराइज बूस्टर, 10 प्रतिशत एंकर बूस्टर, 20 प्रतिशत थ्रस्ट बूस्टर जैसे लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। रीको से भूमि लेने वाले मेगा, अल्ट्रा मेगा विनिर्माण उद्यमों को 10 वर्षों तक फ्लेक्जिबल लैण्ड पेमेंट और 5 वर्षों के लिए 25 प्रतिशत ऑफिस स्पेस हेतु लीज रेन्टल सब्सिडी का लाभ भी देय होगा। *निवेशकों के लिए विशेष इन्सेंटिव्स के प्रावधान* पॉलिसी में विशेष इन्सेंटिव्स का भी प्रावधान किया गया है, जिनमें बैंकिंग, व्हीलिंग और ट्रांसमिशन चार्जेज में छूट, फ्लेक्सिबल लैंड पेमेंट मॉडल, ऑफिस-स्पेस लीज रेंटल सब्सिडी तथा कैप्टिव पावर प्लांट में किए गए निवेश का 51 प्रतिशत पात्र स्थायी पूंजीगत निवेश में शामिल करना शामिल है। इसके साथ ही उद्योगों को दीर्घकालिक राहत देने के लिए 7 वर्षों तक विद्युत शुल्क से शत प्रतिशत छूट, 7 वर्षों तक मंडी शुल्क अथवा बाजार शुल्क का शत प्रतिशत पुनर्भरण, स्टाम्प शुल्क, रूपांतरण शुल्क में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण की व्यवस्था भी की गई है। ग्रीन इन्सेंटिव, स्किल एवं ट्रेनिंग इन्सेंटिव तथा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी क्रिएशन इन्सेंटिव जैसे प्रावधान इस नीति को और अधिक आकर्षक बनाते हैं। ——-



Post Comment